१.५ परम्परागत पाठ्यक्रम र एकीकृत पाठ्यक्रमबिचको अन्तर
१.५ परम्परागत पाठ्यक्रम र एकीकृत पाठ्यक्रमबिचको अन्तर
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पक्षहरू / आधारहरू |
परम्परागत पाठ्यक्रम |
एकीकृत पाठ्यक्रम |
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१. संरचना |
विषयकेन्द्रित (Subject-centered) |
विद्यार्थीकेन्द्रित र जीवनकेन्द्रित (Learner & Life-centered) |
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२. विषयको अवस्थिति |
हरेक विषय अलग–अलग पढाइने |
विभिन्न विषयहरू आपसमा मिलाएर पढाइने |
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३. सिकाइको स्वरूप |
सैद्धान्तिक र विषयवस्तुको ज्ञानमुखी |
व्यावहारिक, परियोजनामूलक (activity/project-based) |
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४. शिक्षकको भूमिका |
ज्ञान दिने (Authority) |
मार्गदर्शक, सह–अध्ययनकर्ता (Facilitator) |
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५. विद्यार्थीको भूमिका |
सुन्ने, रट्ने र परीक्षा दिने |
सिकाइमा सक्रिय सहभागी, खोजकर्ता |
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६.मूल्याङ्कन (Assessment) |
विषयवस्तुमा आधारित परीक्षा–केन्द्रित मूल्याङ्कन |
निरन्तर मूल्याङ्कन, पोर्टफोलियो, परियोजना कार्य आदि |
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७. विषयहरूबिच सम्बन्ध |
पृथक र अलग विषयगत |
अन्तरसम्बन्धित, अन्तरविषयीय (interdisciplinary) |
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८. सिकाइको उद्देश्य |
परीक्षा पास गर्नु, तथ्य याद गर्नु |
जीवनोपयोगी र व्यवहारकुशल सिप तथा आलोचनात्मक सोचको विकास |
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९. सिकाइ वातावरण |
नियन्त्रणमुखी, शिक्षक–केन्द्रित |
लचिलो, रमाइलो, सहयोगी वातावरण |
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१०. जोड |
औपचारिक शिक्षामा, पाठ्यपुस्तक केन्द्रित शिक्षण |
बालमैत्री, व्यावहारिक जीवनसँग जोडिएको शिक्षण |
यसरी परम्परागत पाठ्यक्रम अलि बढी रूढीवादी, परीक्षा–मुखी र शिक्षक–केन्द्रित हुन्छ भने एकीकृत पाठ्यक्रम चाहिँ विद्यार्थीको समग्र विकास, सहकार्य, व्यवहारिकता र जीवन व्यवहारमा केन्द्रित हुन्छ ।